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शनिवार, 21 जनवरी 2017

'आधी आबादी के सरोकार' पुस्तक में अपनी बात

अपनी पुस्तक को हाथ में देखने की सुखद अनुभूति ही कुछ और होती है। हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद द्वारा प्रकाशित हमारी पुस्तक "आधी आबादी के सरोकार" की 10 लेखकीय प्रतियाँ आज ही प्राप्त हुई, वाकई बहुत अच्छा लगा। वर्ष 2017 की हमारी पहली सृजनात्मक उपलब्धि रही ये पुस्तक। यह भी एक अजीब संयोग है कि इस बार प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेला-2017 की थीम भी 'मानुषी' रही, जो महिलाओं द्वारा एवं महिलाओं के ऊपर लेखन को प्रस्तुत करती है। एकेडेमी द्वारा बताया गया है कि "आधी आबादी के सरोकार" पुस्तक को हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद के कार्यालय, स्टॉल के अलावा लोकभारती और राजकमल प्रकाशन की मार्फत भी प्राप्त किया जा सकता है, जो एकेडेमी के पुस्तकों के वितरक भी हैं। फ़िलहाल, इस पुस्तक में 'अपनी बात' के तहत लिखी गई मेरी भावनायें इसकी भावभूमि पर प्रकाश डालती हैं, जिसे यहाँ आप सभी के साथ शेयर कर रही हूँ -


साहित्य और समाज में अन्योन्याश्रित सम्बन्ध है। कई बार साहित्य समाज को पथदृष्टा बन कर राह दिखाता है तो कई बार समाज में चल रही उथल-पुथल साहित्य में कुछ नया रचने की प्रेरणा देती है। तभी तो कहते हैं कि साहित्य अपने समकालीन समाज का आईना होता है।  लेकिन कई बार आईना भी हमें सिर्फ वही दिखाता है जो हम देखना चाहतेहैं। यही कारण है किसमय के साथ साहित्य में तमाम विमर्शों का जन्म हुआ,जैसे- नारी विमर्श, बाल विमर्श, विकलांग विमर्श, दलित विमर्श, आदिवासी विमर्श इत्यादि। ये विमर्श साहित्य को बौना नहीं बनाते बल्कि उसे विस्तार देते हैं। समाज की मुख्यधारा से वंचित तमाम ऐसे आयाम हैं जिनका लिपिबद्ध होकर सामने आना बहुत जरूरी है,ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उनकी भाव भूमि पर अपने को खड़ी कर सकें। 

दुनिया की लगभग आधी जनसंख्या नारियों की है और इस रूप में इन्हें आधी आबादी माना जाता है। एक ऐसी आधी आबादी जो शेष आधी आबादी को जन्मती है,पल्लवित-पुष्पित करती है। ऐसे में जरूरी हैकि आधी आबादी से जुड़े सरोकारों पर गहन विमर्श किया जाए। “आधी आबादी के विमर्श” नामक इस पुस्तक में मैंने ऐसे ही विषयों को अपनी लेखनी के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। 

21वीं सदी की नारी के सामने उसके अपने सपने, महत्वाकांक्षायें, और उन्मुक्त उड़ान भरने की अभिलाषा है। इसके साथ ही उसे परिवार व समाज की परंपराओं और संस्कारों को भी निभाना है। इन सबके बीचस्वाभाविक रूप से उसपर जिम्मेदारियाँ बढ़ती हैं, और कई बार नारी अपने को दोराहे पर खड़ा पाती है। आज की नारी अपने पुरातन दृष्टिकोण को तिलांजलि देकर अपने विवेक और नूतन दृष्टि से एक नई भूमिका लिखना चाहती है। वह अपनी सोच को नई उड़ान देना चाहती है, साथ ही वह अपनी अस्मिता और अस्तित्व को लेकर भी सजग हुई है। 
आज का दौर परिवर्तन का दौर है। बदलाव या परिवर्तन अपनी गतिशीलता का परिणाम है, जो यह दिखाता है कि अमुक समाज, या सोच जड़ नहीं है। परिवर्तन के इस माहौल में  नारी नई इबारत लिखने को तैयार है।आज के इस दौर में नारी का स्वावलंबी होना अति आवश्यक भी हो गया है क्योंकि वह एक ऐसी धुरी है जिसका उत्थान न सिर्फ परिवार का बल्कि समाज और  राष्ट्र का भी उत्थान है। राजनीति, प्रशासन, कॉरपोरेट, सैन्य सेवाओं, आई.टी., खेलकूद, साहित्य, कला, संस्कृति, फिल्म जगत से लेकर तमाम क्षेत्रों में नारी आज नए मुकाम स्थापित कर रही है। कई बार इसे ऐसे भी प्रदर्शित किया जाता है मानो किआधी आबादी ने अपनी ऊँचाइयों को प्राप्त कर लिया है,परजमीनी हकीकत ऐसी नहीं हैं। ये तो एक शुरुआत मात्र है,अभी नारी को एक लंबा सफर तय करना है, उसे पग–पग पर संघर्षों के बीच स्वयं को सिद्ध करना है। 

नारी संबंधित सरोकारों पर मैं एक लंबे समय से लिख रही हूँ, और इस बीच तमाम लेख देश–विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं से लेकर इंटरनेट के संजाल पर प्रकाशित हुए। ये वो विषय हैं जो पारंपरिक से लेकर आधुनिक नारी तक को प्रभावित करते हैं। सिर्फ लेखन के स्तर पर ही नहीं व्यक्तिगत जीवन में भी मैंने उन्हीं संस्कारों को जिया है जो मेरे लेखन में समाहित है। तभी तो आज हमारे आँगन में दो प्यारी बेटियाँ अक्षिता (पाखी) और  अपूर्वा खेल रही हैं। निश्चितत: मैं इनमें आने वाले समय में होने वाले परिवर्तनों का आगाज देखती हूँ और यह महसूस करती हूँ कि किस तरह आज की बेटियाँ, भावी जीवन की नई इबारत लिखने को तत्पर हैं। अपनी यह पुस्तक मैं अपनी इन दोनों प्यारी बेटियों को समर्पित करती हूँ।  

इस पुस्तक के लेखन व प्रकाशन में सबसे बड़ा योगदान मेरे जीवन-साथी कृष्ण कुमार यादव जी का है, जिन्होंने हर पल दाम्पत्य जीवन के साथ साहित्य के क्षेत्र में भी मेरे साथ युगलबंदी की है। इन्होंने विभिन्न मुददों पर मेरे विचारों को और भी प्रखर किया।इनसे प्राप्त प्यार और अनुरागसे मैं सदैव अभिभूत हूँ। 

इस पुस्तक के लिए मैं अपने मम्मी–पापा (श्रीमती सावित्री देवी जी-श्री राजेंद्र प्रसाद जी) की ऋणी हूँ जिन्होंने मुझे वो शिक्षा, संस्कार एवं मूल्य दिये जिसके कारण मैं आज इस रूप में अपने को अभिव्यक्त कर पा रही हूँ। 

मैं डॉ. चम्पा श्रीवास्तव जी की हार्दिक आभारी हूँ जिन्होंने इस पुस्तक का प्राक्कथन लिखकर मेरा हौसला बढ़ाया। हिन्दुस्तान एकेडमी, इलाहाबाद का मैं विशेष आभार व्यक्त करना चाहती हूँ,जिसने इस पुस्तक को प्रकाशित करने का निर्णय लिया और इस रूप में आप सभी के समक्ष प्रस्तुत किया। 

यद्यपि मैंने पूर्ण कोशिश की है कि पुस्तक में तथ्यों को सही रूप मेंप्रस्तुत किया जाए एवं वैचारिकता के पहलू पर आंकते हुए तर्कसंगत रूप में प्रस्तुत किया जाए, लेकिन इसके बावजूद भी यदि किसी प्रकार से त्रुटि रह जाती है तो पाठकगण कृपया उसे मेरे संज्ञान में अवश्य लायें, ताकि इनमें सुधार किया जा सके। 

आशा करती हूँ कि यह पुस्तक आपको अवश्य पसंद आएगी और मेरी लेखनी को आपका स्नेह प्राप्त होगा। 

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस                                (आकांक्षा यादव)
08 मार्च 2016
 
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'आधी आबादी के सरोकार' पुस्तक की विषय सूची 

1. समकालीन परिवेश में नारी विमर्श
2 . आजादी के आंदोलन में भी अग्रणी रही नारी
3 . शिक्षा और साहित्य के विकास में नारी की भागीदारी
4 . सोशल मीडिया और आधी आबादी के सरोकार 
5 . हिन्दी ब्लाॅगिंग को समृद्ध करती महिलाएं
6 . माँ का रिश्ता सबसे अनमोल
7 . घरेलू हिंसा बनाम अस्तित्व की लड़ाई
8 . नारी सशक्तिकरण बनाम अशक्तिकरण
9 . आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में नारी 
10 . राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत


पुस्तक का नाम : आधी आबादी के सरोकार 
लेखिका : आकांक्षा यादव 
प्रकाशक : हिन्दुस्तानी एकेडेमी, 12-डी, कमला नेहरू मार्ग, इलाहाबाद (उप्र) - 211001
कवर डिजाइन : डॉ. रत्नाकर लाल 
संस्करण : प्रथम, प्रकाशन वर्ष : 2017, पृष्ठ-112, मूल्य : रु. 110/- (एक सौ दस रुपए मात्र)
आईएसबीएन (ISBN) : 978-93-85185-05-2


मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

नारी विमर्श के सवालों को उठाती पुस्तक "आधी आबादी के सरोकार"

नारी विमर्श आधुनिक समाज और साहित्य में एक ज्वलंत मुद्दा है। कभी हाशिये पर खड़ी स्त्री और कभी नेतृत्व के नए प्रतिमान गढ़ती, शायद इन दोनों के बीच ही कहीं आज का नारी विमर्श खड़ा है। नारी-सशक्तिकरण आज के दौर की एक सच्चाई है, पर इसका सामान्यीकरण नहीं किया जा सकता। आज भी नारी अपने अस्तित्व और अस्मिता के लिए तमाम प्रतिरोधों के बीच संघर्षरत है। गुलाबी सपनों के बीच आसमां को छूने की हसरत लिए 21वीं सदी की लड़कियाँ तमाम दकियानूसी परम्पराओं  और रूढ़ियों से टकराती नज़र आती हैं। ऐसे ही तमाम विषयों को उठाती मेरी पुस्तक "आधी आबादी के सरोकार" (लेखिका -आकांक्षा यादव) शीघ्र ही हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद से प्रकाशित होकर आने वाली है।  इसके लिए कवर पेज का रेखांकन प्रसिद्ध चित्रकार डॉ. लाल रत्नाकर ने किया है। फ़िलहाल, इस पोस्ट में  डॉ. लाल रत्नाकर के बनाये तमाम चित्रों और उनसे सुसज्जित आवरण पृष्ठ को आप सभी के साथ साझा करते हुए ख़ुशी का अनुभव हो रहा है। इनमें से ही किसी एक का उपयोग "आधी आबादी के सरोकार"  पुस्तक के लिए किया जायेगा !






(आधी आबादी के सरोकार : आकांक्षा यादव)


सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

टॉप हिंदी ब्लॉग्स में शामिल हुआ 'शब्द-शिखर'

इंटरनेट पर हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार और ब्लागिंग के माध्यम से देश-विदेश में अपनी रचनाधर्मिता को विस्तृत आयाम देने वाले ब्लॉगर दम्पति राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर  के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा  यादव के ब्लॉग क्रमश: "डाकिया डाक लाया" (http://dakbabu.blogspot.in/) और "शब्द-शिखर" (http://shabdshikhar.blogspot.in/) को  टॉप हिंदी ब्लॉग्स में शामिल किया गया है। वर्ष 2008 से ब्लॉगिंग में सक्रिय एवम  ''दशक के श्रेष्ठ हिंदी ब्लॉगर दम्पति'' और  सार्क देशों के सर्वोच्च ''परिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मान'' से सम्मानित  दम्पति के दोनों ब्लॉगों को इंडियन टॉप ब्लॉग्स द्वारा 2015-16 के  लिए हाल ही में जारी हिंदी के सर्वश्रेष्ठ 130 ब्लॉगों की डायरेक्टरी में स्थान दिया गया है। गौरतलब है कि वर्तमान में हिंदी में एक लाख से ज्यादा ब्लॉग संचालित हैं।


डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा यादव  नेपाल, भूटान और श्रीलंका सहित तमाम देशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन में सम्मानित हो चुके हैं। जर्मनी के बॉन शहर में होने वाले ग्लोबल मीडिया फोरम (2015) के दौरान 'पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड' श्रेणी में  आकांक्षा यादव के ब्लॉग 'शब्द-शिखर'  को हिंदी के सबसे लोकप्रिय ब्लॉग के रूप में भी सम्मानित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा वर्ष  2012 में इस दम्पति को  ”न्यू मीडिया एवं ब्लाॅगिंग” में उत्कृष्टता के लिए ''अवध सम्मान'' से भी विभूषित किया जा  चुका  है। सौ से ज्यादा देशों में देखे-पढ़े जाने वाले इनके ब्लॉग 'डाकिया डाक लाया' और 'शब्द-शिखर' पर अब तक 738 और 512 पोस्ट प्रकाशित हैं।


 ब्लॉगिंग के साथ-साथ कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव साहित्य और लेखन में भी सक्रिय हैं।  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने के साथ-साथ,  अब तक श्री यादव की 7 पुस्तकें और नारी सम्बन्धी मुद्दों पर प्रखरता से लिखने वालीं आकांक्षा यादव की 3 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। देश-दुनिया में शताधिक सम्मानों से विभूषित यादव दम्पति एक लंबे समय से ब्लॉग और सोशल  मीडिया के माध्यम से हिंदी साहित्य एवं विविध विधाओं में अपनी रचनाधर्मिता को प्रस्फुटित करते हुये अपनी व्यापक पहचान बना चुके हैं।









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Hindi-blog-directory

The 2015-16 edition of the Directory of Best Hindi Blogs has been released on 30th September 2016. It has 130 blogs, listed alphabetically [according to the operative part of the URL]. For more details on compilation etc, you can visit the post announcing the release of the Directory.

30 सितंबर 2016 को जारी हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगों की डायरेक्टरी का 2015-16 संस्करण आपके सामने प्रस्तुत है. इसमें 130 ब्लॉग हैं जिन्हें अंग्रेज़ी के अक्षरों के क्रम में लगाया गया है. संकलन आदि के बारे में अधिक जानकारी के लिए डायरेक्टरी विमोचन पर जारी की गई इस पोस्ट पर जाएं.

4yashoda मेरी धरोहर 
aajtak-patrika दीपक भारतदीप की हिन्दी एक्सप्रेस पत्रिका 
aarambha आरम्भ 
abchhodobhi अब छोड़ो भी 
akanksha-asha Akanksha 
akhtarkhanakela आपका-अख्तर खान "अकेला" 
amitaag Safarnaamaa... सफ़रनामा... 
anilpusadkar अमीर धरती गरीब लोग 
anitanihalani मन पाए विश्राम जहाँ 
anubhaw अनुभव 
anunad अनुनाद 
apnapanchoo अपना पंचू 
apninazarse अपनी नज़र से 
archanachaoji मेरे मन की 
artharthanshuman Arthaat 
ashaj45 स्वप्नरंजिता 
ashokbajajcg ग्राम चौपाल 
avojha मुक्ताकाश.... 
baatapani बात अपनी 
bal-kishore Bal-Kishore 
bamulahija Bamulahija 
banarahebanaras बना रहे बनारस 
bastarkiabhivyakti बस्तर की अभिव्यक्ति -जैसे कोई झरना... 
batangad बतंगड़ BATANGAD 
bhadas भड़ास blog 
bhartiynari भारतीय नारी 
boletobindas Bole to...Bindaas....बोले तो....बिंदास 
brajkiduniya ब्रज की दुनिया 
burabhala बुरा भला 
chaitanyanagar हंसा जाइ अकेला 
chandkhem हरिहर 
charchamanch चर्चा मंच 
chavannichap chavanni chap (चवन्नी चैप) 
chouthaakhambha चौथा खंबा 
daayari डायरी 
dakbabu डाकिया डाक लाया 
devendra-bechainaatma बेचैन आत्मा 
dillidamamla ऐवें कुछ भी 
doosrapahlu दूसरा पहलू 
drashu ***…….सीधी खरी बात…….*** 
dr-mahesh-parimal संवेदनाओं के पंख 
drparveenchopra मीडिया डाक्टर 
ekla-chalo एकला चलो 
ek-shaam-mere-naam एक शाम मेरे नाम 
firdausdiary Firdaus Diary 
geetkalash गीत कलश 
girijeshrao एक आलसी का चिठ्ठा 
gurugodiyal अंधड़ ! 
gustakh गुस्ताख़ 
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